प्रयागराज: इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रों का उग्र धरना, निलंबन रद्दीकरण की मांग पर अड़े रहे प्रदर्शनकारी *TYUI* #14


प्रयागराज केइलाहाबाद विश्वविद्यालय में 24 नवंबर 2025 को छात्रों ने निलंबित साथियों की बहाली की मांग को लेकर धरना दिया। दिशा छात्र संगठन के नेतृत्व में सुबह से मुख्य द्वार पर जुटे सैकड़ों छात्रों को रोकने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए, लेकिन वे डटे रहे। विश्वविद्यालय ने प्रदर्शन को अलोकतांत्रिक बताते हुए अधिकांश प्रदर्शनकारियों को बाहरी करार दिया। यह आंदोलन शुक्रवार की झड़प के बाद तेज हुआ है, जो छात्रों के अधिकारों पर सवाल खड़े करता है।
मुख्य द्वार पर सुबह से सैलाब, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सोमवार कीसुबह प्रयागराज के इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्र इकट्ठा हो गए। पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर अपील के जरिए मुख्य द्वार पर धरना देने का आह्वान किया गया था। दिशा छात्र संगठन की अगुवाई में यह प्रदर्शन निलंबित छात्र-छात्राओं के निलंबन रद्द करने की मांग पर केंद्रित रहा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी द्वारों पर सुरक्षाकर्मियों की भारी तैनाती की। छात्रों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया।

शुक्रवार की घटना ने भड़काया आंदोलन का दौर
यह धरनाशुक्रवार को हुई घटनाओं का प्रत्यक्ष परिणाम है। उस दिन भी छात्र मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए थे, जिसके दौरान सुरक्षाकर्मियों से झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी थी कि यदि निलंबन संबंधी मांगें पूरी नहीं हुईं तो सोमवार से बड़ा आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। छात्र संगठन के नेताओं का कहना है कि प्रशासन का मनमाना रवैया छात्रों के अधिकारों का हनन कर रहा है, और तत्काल निलंबन कार्यवाही वापस लेनी चाहिए।

प्रशासन का कड़ा जवाब, बाहरी तत्वों का आरोप
प्रदर्शन कोविफल करने के प्रयास में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़े उपाय किए, लेकिन छात्रों ने हार नहीं मानी और अपनी मांगों पर अडिग रहे। चीफ प्रॉक्टर ने स्पष्ट किया कि धरने में शामिल 80 प्रतिशत छात्र बाहरी हैं, और यह आंदोलन अलोकतांत्रिक है। दोपहर 2:30 बजे प्रशासनिक अधिकारियों ने मीडिया से बातचीत में स्थिति को नियंत्रित बताते हुए छात्रों से शांतिपूर्ण व्यवहार की अपील की। यह विवाद अब छात्रों और प्रशासन के बीच गहराते टकराव को उजागर कर रहा है।

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