लखनऊ: SIR फॉर्म भरने के दबाव से कर्मचारियों की जान जा रही, सपा ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप *FGHJ* #15

 समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को SIR फॉर्म भरने के लिए BLO और अन्य कर्मचारियों पर अनुचित दबाव का आरोप लगाया। उत्तर प्रदेश में व्यस्त शादी-ब्याह के मौसम में भी जल्दबाजी से एक सुपरवाइजर की फतेहपुर में आत्महत्या हो गई। विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील करते हुए इसे लोकतंत्र पर धोखा बताया। यह मुद्दा बिहार चुनावों की हार से भी जोड़ते हुए भाजपा की साजिश करार दिया। 

सरकारी जल्दबाजी से बढ़ रही मुश्किलें
उत्तर प्रदेश में SIR फॉर्म भरने की प्रक्रिया को लेकर सरकारी स्तर पर तेजी दिखाई जा रही है, जिसका असर आम कर्मचारियों पर पड़ रहा है। समाजवादी पार्टी के नेतृत्व ने इसे लेकर चिंता जताई है कि BLO और अन्य सहायक कर्मियों पर अनावश्यक वर्कलोड थोपा जा रहा है। राज्य में इस समय शादियों का सिलसिला चल रहा है और लोग अपनी जिंदगी के महत्वपूर्ण अवसरों में व्यस्त हैं, लेकिन इन बातों की अनदेखी की जा रही है। नगर निगम के सफाई कर्मचारियों को भी फॉर्म भरने में सहायता के लिए तैनात किया गया है, जो अतिरिक्त बोझ बढ़ा रहा है।  

फतेहपुर की त्रासद घटना ने बढ़ाई चिंता
पिछले दिन फतेहपुर में एक सुपरवाइजर पर दबाव के कारण आत्महत्या कर ली, जिसकी जानकारी मिलने पर सपा नेतृत्व ने तत्काल संज्ञान लिया। इसी क्रम में मलिहाबाद के एक BLO विजय कुमार वर्मा की पत्नी संगीता को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि जल्दबाजी से न केवल मानसिक तनाव बढ़ रहा है, बल्कि जानलेवा परिणाम भी सामने आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल से जुड़े संदर्भों में भी इसी तरह की शिकायतें उठी हैं, जहां दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।  

विपक्ष की एकजुटता पर जोर, साजिश का खुलासा जरूरी
एक दिन पूर्व सभी विपक्षी दलों और एनडीए के सहयोगी दलों से अपील की गई थी कि वे एक होकर भाजपा के कथित वोट-कटौती के प्रयासों का पर्दाफाश करें। इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बताया गया, जिसमें चेतावनी दी गई कि अगर समय रहते नहीं रोका गया तो यह खेत-जमीन, राशन, जाति और आरक्षण जैसी मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच सकता है। सपा ने संसद के बाद सड़क पर उतरने का ऐलान किया है ताकि इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाया जा सके।  

बिहार चुनावों से सबक, जातिगत जनगणना की मांग
भाजपा के वादों पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि वे पूरे नहीं होते। बिहार विधानसभा चुनावों में PDA को हार नहीं मिली, बल्कि जानबूझकर हराया गया। PDA के बढ़ते समर्थन से भाजपा में भय का माहौल है। सपा ने SIR प्रक्रिया के जवाब में जातिगत जनगणना की मांग रखी थी, लेकिन इसे टाल दिया गया क्योंकि इससे सत्ताधारी दल को नुकसान होता। यह सब देशवासियों के हितों के विरुद्ध एक बड़ी चाल है, जो ऐतिहासिक गुलामी से भी बदतर स्थिति पैदा कर सकती है।  

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