प्रयागराज:सीजेआई ने संविधान की ताकत बताई, अखंड भारत का श्रेय मूल ढांचे को दिया *SEAR* #23

भारत के मुख्य न्यायाधीश शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक सेमिनार में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में हालात देखने के बाद यह स्पष्ट है कि कई चुनौतियों के बावजूद भारत का अखंड बने रहना संविधान की ही देन है। उन्होंने डॉ. अंबेडकर को सच्चा देशभक्त बताया और न्यायपालिका द्वारा मौलिक अधिकारों के विस्तार पर प्रकाश डाला।

संविधान ने बनाए रखी देश की एकता

भारत केमुख्य न्यायाधीब शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आयोजित एक सेमिनार को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश के भीतर और बाहर की कई चुनौतियों के बावजूद भारत का अखंड रहना उसके संविधान की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने पड़ोसी देशों के संदर्भ में कहा कि वहां जो कुछ हुआ, उसे सबने देखा है, यहां की स्थिरता संवैधानिक ढांचे का परिणाम है।

मौलिक अधिकारों का हुआ विस्तार

मुख्य न्यायाधीश नेअपने संबोधन में बताया कि पिछले 75 वर्षों में न्यायपालिका ने कई ऐसे अधिकारों को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया है, जिनके बारे में संविधान निर्माताओं ने शुरू में नहीं सोचा था। उन्होंने कहा कि जीवन के अधिकार को अब केवल जीवित रहने के अधिकार के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार के रूप में देखा जाता है। इसमें आश्रय, भोजन, वस्त्र, प्रदूषण मुक्त पर्यावरण, स्वच्छता, उचित चिकित्सा सुविधा और जबरन श्रम से मुक्ति जैसे अधिकार शामिल हैं।

मूल संरचना का सिद्धांत रहा अहम

संवैधानिक विकास पर प्रकाश डालतेहुए मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि शुरुआत में संसद की संशोधन शक्ति को असीमित माना जाता था, लेकिन गोलकनाथ और केशवानंद भारती जैसे मामलों के बाद यह स्थापित हुआ कि संसद संविधान की मूल संरचना को बदल नहीं सकती। केशवानंद भारती मामले में न्यायालय ने संविधान की मूल विशेषताओं जैसे विधि का शासन, संविधान की सर्वोच्चता, शक्तियों का पृथक्करण, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संघीय ढांचे को इसका हिस्सा बताया।

मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्व हैं पूरक
यह भीस्पष्ट किया गया कि मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्व एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। न्यायालय ने इन्हें संविधान के दो पहिये बताया है। साथ ही, यह माना गया है कि यदि कोई कानून सामाजिक न्याय के वायदे को पूरा करता है तो उसे संवैधानिक संरक्षण मिलना चाहिए। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य न्यायाधीश ने भी संविधान को सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बताया। कार्यक्रम से पहले मुख्य न्यायाधीश ने विश्वविद्यालय में विज्ञान संकाय की नवनिर्मित इमारत का उद्घाटन भी किया, जिसमें नई रसायन विज्ञान इमारत, व्याख्यान थिएटर और नई पुस्तकालय इमारत शामिल हैं।

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