उत्तर प्रदेश: अवैध घुसपैठियों के लिए दिल्ली की तर्ज पर बनेंगे डिटेंशन सेंटर, बांग्लादेशी-रोहिंग्या के साथ अफ्रीकी नागरिक भी निशाने पर *CFRH* #45

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अवैध विदेशी घुसपैठियों को चिन्हित कर उन्हें वापस भेजने के लिए दिल्ली की तरह जिलों में डिटेंशन सेंटर बनाए जाएंगे। बांग्लादेशी, रोहिंग्या और अफ्रीकी मूल के संदिग्धों पर खास नजर है। कई जिलों में जगह चिन्हित करने का काम शुरू हो गया है।

सीएम के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई

मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही प्रदेश के विभिन्न जिलों में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों की पहचान शुरू कर दी गई है। इन्हें मूल देश भेजने की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक सुरक्षित रखने के लिए डिटेंशन सेंटर बनाए जा रहे हैं। खाली सरकारी भवन, सामुदायिक केंद्र, पुलिस लाइन और थानों को इसके लिए चिन्हित किया जा रहा है।

 दिल्ली मॉडल को अपनाएगा यूपी

दिल्ली में इस समय करीब 18 डिटेंशन सेंटर चल रहे हैं, जहां लगभग 1500 विदेशी नागरिकों को कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है। इनमें ज्यादातर बांग्लादेशी, रोहिंग्या और अफ्रीकी मूल के लोग हैं। यहां रहने वालों को खाना, इलाज और अन्य जरूरी सुविधाएं दी जाती हैं। सत्यापन के बाद एफआरआरओ के माध्यम से उन्हें वापस भेजा जाता है। अब उत्तर प्रदेश भी यही व्यवस्था लागू करने जा रहा है।

एनसीआर में अफ्रीकी नागरिकों की संख्या ज्यादा

पुलिस सूत्रों के अनुसार बांग्लादेशी और रोहिंग्या तो पूरे प्रदेश में फैले हैं, लेकिन नोएडा और गाजियाबाद जैसे एनसीआर जिलों में अफ्रीकी देशों से आए अवैध नागरिकों की तादाद ज्यादा है। इनमें से कई मादक पदार्थ तस्करी और साइबर अपराध में शामिल पाए गए हैं। इस बार इन्हें भी विशेष अभियान के दायरे में लिया जाएगा।

केंद्र के दिशा-निर्देश पर आगे बढ़ रहा यूपी

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को डिटेंशन सेंटर बनाने की मानक प्रक्रिया भेजी है। इसके तहत जिला प्रशासन और पुलिस को केंद्रों के प्रबंधन व सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। पकड़े गए हर व्यक्ति की रोजाना की जानकारी गृह विभाग को भेजनी होगी। पश्चिम बंगाल और असम की तरह यूपी में भी बीएसएफ की मदद से घुसपैठियों को सीमा पार कराया जाएगा।

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