सुल्तानपुर: राहुल गांधी पर मानहानि मुकदमे की सुनवाई स्थगित, 8 दिसंबर को अगला चरण *JHGF* #16

सुल्तानपुर कीएमपी-एमएलए कोर्ट में बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े 2018 के मानहानि मामले की सुनवाई टल गई। एक अधिवक्ता के आकस्मिक निधन के कारण अदालत में शोकसभा आयोजित हुई, जिससे कार्यवाही संभव न हो सकी। अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2025 को तय की गई है। यह मामला भाजपा नेता विजय मिश्रा द्वारा कर्नाटक चुनाव के दौरान अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़ा है, जहां अब तक गवाहों की जांच जारी है।
मामले का पृष्ठभूमि और प्रारंभिक घटनाक्रम

यह मुकदमा वर्ष 2018 से चला आ रहा है, जब हनुमानगंज निवासी भाजपा नेता विजय मिश्रा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया। आरोप था कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर असभ्य टिप्पणी की थी। इस दावे के आधार पर सुल्तानपुर की अदालत में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली।

पिछले पांच वर्षों में कई मोड़ आए। दिसंबर 2023 में राहुल गांधी के अदालत में पेश न होने पर तत्कालीन न्यायाधीश ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद फरवरी 2024 में राहुल गांधी ने स्वयं कोर्ट में आत्मसमर्पण किया, जहां विशेष मजिस्ट्रेट ने उन्हें दो मुचलनों पर 25-25 हजार रुपये की जमानत प्रदान की।

हालिया प्रगति और बाधाओं का दौर

गत 26 जुलाई 2024 को राहुल गांधी ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया, जिसमें उन्होंने खुद को बेकसूर ठहराया। इसके बाद कोर्ट ने वादी पक्ष को साक्ष्य पेश करने का आदेश दिया। तब से गवाहों की जांच चल रही है, लेकिन प्रक्रिया में देरी हो रही है। अब तक केवल एक गवाह की पूर्ण जिरह पूरी हुई है, जबकि दूसरे की शुरुआत हो चुकी है।

कारणों में वकीलों की हड़तालें और गवाहों का अनुपस्थित रहना प्रमुख हैं, जिससे सुनवाई बार-बार प्रभावित हो रही है। बुधवार को भी इसी तरह की स्थिति बनी, जब अधिवक्ता सुधांशु उपाध्याय के निधन पर दीवानी न्यायालय में शोकसभा रखी गई। इस कारण एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई स्थगित कर दी गई।

आगे की राह और संभावित प्रभाव

अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2025 को निर्धारित है, जहां गवाहों की जांच आगे बढ़ने की उम्मीद है। यह स्थगन राजनीतिक मामलों में अदालती प्रक्रियाओं की अनिश्चितता को दर्शाता है, खासकर जब हड़तालें और अप्रत्याशित घटनाएं बाधा बन रही हों। कुल मिलाकर, पांच साल पुराने इस केस में अभी लंबा सफर बाकी है।

टिप्पणियाँ