अयोध्या: लाखों श्रद्धालुओं ने पंचकोसी परिक्रमा में लगाए 'जय श्रीराम' के नारे #18 *AQW*

अयोध्या में शनिवार, 1 नवंबर की सुबह चार बजकर दो मिनट पर शुभ मुहूर्त में पंचकोसी परिक्रमा शुरू हुई। लाखों रामभक्तों ने 'जय श्रीराम' के नारों के साथ यह पवित्र यात्रा शुरू की। यह परिक्रमा लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में हो रही है और रात दो बजकर 57 मिनट तक चलेगी। देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूरे अनुशासन से भाग लिया।


परिक्रमा का शुभारंभ और उत्साह

रामनगरीअयोध्या में शनिवार, 1 नवंबर की सुबह भोर में चार बजकर दो मिनट पर पंचकोसी परिक्रमा का शुभारंभ हुआ। इस शुभ मुहूर्त में लाखों रामभक्तों ने 'जय श्रीराम' के गगनभेदी नारों के साथ परिक्रमा प्रारंभ की, जिससे पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ परिक्रमा पथ पर चलकर भक्ति की एक अद्भुत मिसाल पेश की। यह परिक्रमा भगवान श्रीराम की पवित्र भूमि की लगभग 15 किलोमीटर की परिधि में हो रही है और इसका समापन रात दो बजकर 57 मिनट पर होगा।


प्रशासन की व्यापक तैयारियाँ

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। परिक्रमा मार्ग पर सुरक्षा बलों की कड़ी तैनाती की गई है और ड्रोन कैमरों के माध्यम से निरंतर निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य शिविर, पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और सफाई का विशेष प्रबंध किया गया है। इन सबने श्रद्धालुओं के लिए एक सुगम और सुरक्षित वातावरण तैयार किया है।

धार्मिक महत्व और आयोजन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचकोसी परिक्रमा को मोक्षदायिनी माना जाता है। ऐसी आस्था है कि यह न केवल पापों का नाश करती है बल्कि श्रद्धालुओं के जीवन को पवित्र और कल्याणकारी बनाती है। परिक्रमा पथ के साथ-साथ जगह-जगह मंदिरों में भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण और राम नाम संकीर्तन जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। चौदह कोसी परिक्रमा की सफलता के बाद पंचकोसी परिक्रमा ने अयोध्या में भक्ति के इस महापर्व को पूर्णता प्रदान की है। रामनगरी का यह आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम श्रद्धालुओं के हृदय पर एक अमिट छाप छोड़ रहा है।


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