उत्तर प्रदेश: 10 साल तक की किरायेदारी पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट *FJHB* #19

उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 नवंबर 2025 को कैबिनेट बैठक में 10 वर्ष तक की अवधि के किरायानामा विलेखों पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य किरायेदारी को सरल और पारदर्शी बनाना है, ताकि विवाद कम हों और अधिक लोग लिखित समझौते रजिस्टर्ड कराएं। टोल और खनन पट्टों को इस छूट से बाहर रखा गया है।


उत्तर प्रदेश सरकार ने किरायेदारी समझौतों को औपचारिक रूप देने और विवादों को कम करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने 10 वर्ष तक की अवधि के किरायानामा विलेखों पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में व्यापक छूट को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय शुक्रवार, 14 नवंबर 2025 को हुई बैठक में लिया गया।

किरायेदारी को सरल बनाने की पहल
इस कदम का मुख्य उद्देश्य राज्य में किरायेदारी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है। सरकार चाहती है कि भवन मालिक और किरायेदार दोनों लिखित रूप में किरायानामा तैयार करें और उसे पंजीकृत कराएं। इससे किरायेदारी विनियमन अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके और विवादों में कमी आएगी। नई व्यवस्था के तहत, किरायेदारी विलेखों पर अधिकतम स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस की सीमा तय कर दी गई है।

पुरानी व्यवस्था में समस्याएं
वर्तमान नियमों के मुताबिक, एक वर्ष से अधिक अवधि के किरायानामे की रजिस्ट्री अनिवार्य है। लेकिन आमतौर पर अधिकांश किरायानामे मौखिक होते हैं या लिखित होने पर भी पंजीकृत नहीं कराए जाते। ऐसे मामलों का पता अक्सर जीएसटी विभाग या बिजली विभाग जैसी एजेंसियों की जांच के दौरान चलता है, और बाद में स्टाम्प शुल्क की वसूली की कार्रवाई करनी पड़ती है। सरकार का मानना है कि उच्च शुल्क के कारण लोग विलेख लिखने और रजिस्ट्री कराने से बचते हैं।

नई नीति के मुख्य प्रावधान
छूट प्रणाली के तहत, किरायेदारी विलेखों पर अधिकतम स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस अब एक निश्चित राशि से अधिक नहीं ली जाएगी। यह सीमा किरायेदारी की अवधि और औसत वार्षिक किराए के आधार पर लागू होगी, जिसमें औसत वार्षिक किराए की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये रखी गई है। हालांकि, टोल संबंधी पट्टे और खनन पट्टों को इस छूट से बाहर रखा गया है, ताकि राजस्व हानि न हो।

आम लोगों को सीधा लाभ
इस फैसले का सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा। अब किरायेदारी विलेखों पर भारी स्टाम्प शुल्क भरने की बाध्यता नहीं रहेगी, जिससे लोग अधिक सहजता से रजिस्ट्री करा सकेंगे। इससे किरायेदारी समझौते अधिक पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत होंगे, और भविष्य में होने वाले विवादों में कमी आएगी।

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