नई दिल्ली: संसद के शीत सत्र में 10 विधेयक, न्यूक्लियर क्षेत्र में निजी कंपनियों को नई भूमिका *DCVG* #24
संसद काशीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें 19 दिनों में 15 बैठकें होंगी। इस दौरान 10 नए विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें परमाणु ऊर्जा विधेयक प्रमुख है। यह निजी कंपनियों को न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करने की अनुमति देगा। साथ ही उच्च शिक्षा आयोग विधेयक से यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई को एकीकृत किया जाएगा। यह बदलाव शिक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधार लाएंगे।
सत्र की रूपरेखा और अपेक्षाएं
संसदीय कार्यवाहीका शीतकालीन चरण 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर को समाप्त होगा। इस अवधि में कुल 19 दिनों के बीच 15 बैठकें निर्धारित हैं। लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, सत्र में 10 महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत होने की संभावना है, जो विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत बदलाव लाने वाले साबित हो सकते हैं। इनमें ऊर्जा, शिक्षा, सड़क परिवहन और वित्तीय बाजारों से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। यह सत्र पिछले मानसून सत्र की तुलना में अधिक संक्षिप्त है, लेकिन विधायी प्रक्रिया को गति देने पर केंद्रित दिख रहा है।
न्यूक्लियर ऊर्जा में निजी भागीदारी का नया द्वार
परमाणुऊर्जा विधेयक, 2025 सत्र का सबसे चर्चित प्रस्ताव होगा। वर्तमान में देश के सभी न्यूक्लियर पावर प्लांट सरकारी नियंत्रण वाली इकाइयों, जैसे एनपीसीआईएल के माध्यम से ही संचालित होते हैं। इस विधेयक से भारतीय और विदेशी निजी कंपनियां इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकेंगी, जिससे परमाणु ऊर्जा के उपयोग, नियंत्रण और विनियमन के लिए एक नया ढांचा बनेगा। यह कदम ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने की दिशा में बड़ा परिवर्तन साबित हो सकता है।
शिक्षा प्रणाली में एकीकरण और स्वायत्तता
उच्च शिक्षाआयोग ऑफ इंडिया विधेयक से मौजूदा नियामक संस्थाओं—यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई—को समाप्त कर एक एकल आयोग में विलय किया जाएगा। इसका लक्ष्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को अधिक स्वतंत्रता प्रदान करना तथा प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना है। अन्य प्रमुख विधेयकों में राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक शामिल है, जो भूमि अधिग्रहण को सरल और त्वरित बनाने पर जोर देगा, ताकि राजमार्ग परियोजनाओं में विलंब कम हो। कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 कंपनी अधिनियम 2013 और एलएलपी कानून में संशोधन लाएगा। साथ ही सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड विधेयक (एसएमसी), 2025 और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (संशोधन) विधेयक भी पेश होंगे।
पिछले सत्र की छाया और संभावित चुनौतियां
पिछलामानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चला था, जिसमें 21 बैठकें हुईं। हालांकि, बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर विपक्षी हंगामे के कारण लोकसभा में निर्धारित 120 घंटों के बजाय केवल 37 घंटे और राज्यसभा में 41 घंटे ही कार्यवाही चली। कुल 27 विधेयक पारित हुए, जिनमें गिरफ्तार प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को पद से हटाने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक प्रमुख था, जिसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया। विपक्ष मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ला सकता है, जो इस सत्र में बहस का विषय बन सकता है।
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