पहली स्वरक्षक महिला थी भगवान सूर्य की पत्नी देवी संध्या: डॉ० सुधीर प्रकाश #1 *SQ*

डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या के अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संस्थान में आज "अंतर्राष्ट्रीय महिला मानवाधिकार रक्षक दिवस" मनाया गया। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में संस्थान के वरिष्ठतम शिक्षक डॉ सुधीर प्रकाश ने विस्तृत रूप से अपनी संस्कृति, सभ्यता और महिलाओं के रक्षक के रूप में योगदान की चर्चा की।
 
उन्होंने स्कंद पुराण और विष्णु पुराण की भगवान सूर्य परिवार की कहानी की चर्चा करते हुए सूर्य की पत्नी देवी संध्या को एक महान विदुषी और अनुसंधानी महिला बताया। जिन्होंने स्वरक्षा में न सिर्फ अपना क्लोन बनाया जिसका नाम छाया रखा बल्कि उसमें छाया के सारे गुण भी प्रतिपूर्ति किया। उन्होंने सती प्रथा और जौहर प्रथा में अंतर बताते हुए कहा  कि विदेशी मतावलम्बियो कुकृतियो से बचने के लिए महिलाओं ने जौहर प्रारंभ किया। आज बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के बनाए हुए संविधान में महिलाओं को समानता का अधिकार प्राप्त है किंतु समाज का चरित्र अभी भी बहुत सारे विषमताएं को जन्म देता है जो एक दुर्भाग्य है। उन्होंने आव्हान किया की समाज में सभी को महिलाओं के रक्षक के रूप में काम करना चाहिए साथ ही महिलाओं को भी स्वरक्षक प्रणाली अपनाना चाहिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते डॉ० मनीषा यादव  ने समाज में उपलब्ध बहुत सारे रक्षक प्रणालियों की चर्चा करते हुए बताया की आज  स्वयं सहायता समूह, सरकार के द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर, नॉन गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। कार्यक्रम में डॉ० पीयूष राय ने मानव श्रृंखला बनाकर डिफेंडर के रूप में मदद करने की युक्ति बताई। इस कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन विभाग की शिक्षिका डॉ० शिक्षा जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ० बंदिता पांडेय, डॉ०प्रियंका श्रीवास्तव, डॉ०शांभवी, डॉ० निधि प्रसाद समेत बहुत सारी छात्र-छात्राएं और कर्मचारी उपस्थित थे।

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