यूपी: 50 से अधिक छात्र वाले प्राथमिक स्कूल नहीं होंगे मर्ज, शिक्षा मंत्री ने दिया बड़ा बयान #7 *OW*


[सारांश:]
शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने गुरुवार को लखनऊ में घोषणा की कि 50+ छात्र या 1 किमी से अधिक दूरी वाले प्राथमिक स्कूल मर्ज नहीं होंगे। पहले मर्ज हुए ऐसे स्कूलों का विलय रद्द होगा। कोई शिक्षक पद नहीं कटेगा और खाली भवनों में बाल वाटिका शुरू की जाएगी।



चलिए जानते हैं सरकार का नया फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्राथमिक स्कूलों के विलय (मर्जर) को लेकर बड़ा रुख बदला है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने गुरुवार को लखनऊ के लोक भवन में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया: "जिन स्कूलों में 50 या उससे अधिक छात्र हैं या जो 1 किलोमीटर से ज्यादा दूर हैं, उनका विलय नहीं होगा। पहले से मर्ज हुए ऐसे स्कूलों को अलग किया जाएगा (अनपेयर)।"

क्या होगा मर्ज हुए स्कूलों का?

मंत्री ने बताया कि अब तक 10,827 स्कूलों का विलय हुआ था, लेकिन नए मानकों के खिलाफ जाने वाले स्कूलों को फिर से स्वतंत्र कर दिया जाएगा। साथ ही, दो अहम आश्वासन दिए:

  1. कोई स्कूल पूरी तरह बंद नहीं होगा।
  2. एक भी शिक्षक के पद समाप्त नहीं किए जाएंगे।

खाली स्कूल भवनों का क्या होगा उपयोग?

विलय से खाली हुए भवनों को अब बाल वाटिका में बदला जाएगा। इसमें 3 से 6 साल के बच्चों को पढ़ाया जाएगा। महिला एवं बाल कल्याण विभाग के सहयोग से इन्हें चलाया जाएगा और जेम पोर्टल के माध्यम से 18,000 शिक्षकों की भर्ती की जा रही है।

शिक्षक भर्ती पर क्या है योजना?

मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार भर्तियों के खिलाफ नहीं है। छात्र-शिक्षक अनुपात के हिसाब से काम किया जाएगा:

  • 50 छात्रों वाले स्कूल में 2 सहायक शिक्षक + 1 विषय शिक्षक नियुक्त होंगे।
  • जरूरत पड़ी तो नई भर्तियां की जाएंगी।

कोर्ट और विवाद का पूरा पिछला घटनाक्रम

सरकार ने 16 जून 2025 को कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के विलय का आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ सीतापुर की छात्रा कृष्णा कुमारी समेत 51 बच्चों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 7 जुलाई को सिंगल बेंच ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन बाद में डबल बेंच ने सीतापुर के 14 स्कूलों के विलय पर रोक लगा दी। अगली सुनवाई 21 अगस्त को है।

शिक्षक संघ क्यों कर रहे थे विरोध?

  • यूपी महिला शिक्षक संघ की अध्यक्ष सुलोचना मौर्य ने कहा था कि दूरी बढ़ने से गरीब बच्चे स्कूल छोड़ देंगे।
  • यूपी प्राइमरी शिक्षक संघ के अध्यक्ष योगेश त्यागी ने आरोप लगाया था कि यह आदेश शिक्षा का अधिकार (RTE) और बाल संरक्षण कानून का उल्लंघन है।

सरकारी आंकड़े बताते हैं चिंताजनक स्थिति

  • छात्र संख्या में गिरावट: 2021-22 में 1.91 करोड़ छात्र थे, जो अब घटकर 1.49 करोड़ रह गए हैं।
  • पद रिक्त: 70% से अधिक परिषदीय स्कूलों में प्रधानाध्यापक के पद कार्यवाहक हैं।
  • पिछला विलय: 2017-18 के बाद से करीब 28,000 स्कूल मर्ज हो चुके हैं, जिससे इतने ही प्रधानाध्यापक पद खत्म हुए।

आगे की राह: अभ्युदय स्कूलों पर जोर

सरकार हर जिले में मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय (कक्षा 1-8) खोल रही है, जिनमें स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स फैसिलिटी जैसी हाईटेक सुविधाएं होंगी। इसी तरह मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल (कक्षा 1-12) भी स्थापित किए जा रहे हैं, जिन पर 30 करोड़ रुपये प्रति स्कूल खर्च होंगे।

मंत्री सिंह ने दावा किया कि विलय का उद्देश्य सिर्फ छात्रों को बेहतर शिक्षा और संसाधन उपलब्ध कराना था। नए नियमों से अब छोटे और दूरस्थ स्कूलों के बच्चों को राहत मिलेगी।

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