UPDATE - यूपी: स्कूल विलय के बाद खाली कैंपस में चलेंगी बालवाटिकाएं, 8800 शिक्षकों की भर्ती शुरू #8 *GHW*
सारांश:
यूपी में कम नामांकन वाले प्राथमिक स्कूलों के विलय के बाद खाली हुए परिसरों में बालवाटिकाएं शुरू होंगी। शिक्षा मंत्रालय ने 8800 ईसीसीई एजुकेटर भर्ती के लिए बजट स्वीकृत किया है। महानिदेशक कंचन वर्मा ने 75 जिलों के बीएसए को 30 सितंबर तक भर्ती पूरी करने के निर्देश दिए। लखनऊ, गोंडा, सुल्तानपुर, प्रयागराज समेत कई जिलों में एजुकेटर आवंटित होंगे।
विलय के बाद खाली स्कूल कैंपस में बालवाटिकाएं
यूपी में कम नामांकन वाले परिषदीय स्कूलों के विलय (पेयरिंग) के बाद खाली हुए कैंपस अब बालवाटिकाओं (प्री-प्राइमरी स्कूल) के रूप में चलेंगे। इन्हें बेहतर बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ईसीसीई) एजुकेटर भर्ती का फैसला किया है।
8800 ईसीसीई एजुकेटर भर्ती की प्रक्रिया शुरू
शिक्षा मंत्रालय ने वार्षिक परियोजना के तहत 8800 ईसीसीई एजुकेटर की भर्ती के लिए बजट मंजूर किया है। इन्हें प्रदेश के परिषदीय और कंपोजिट स्कूलों में तैनात किया जाएगा। इसका मकसद को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं की गुणवत्ता सुधारना है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने स्पष्ट किया कि भर्ती जेम पोर्टल के जरिए होगी और इसे 30 सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।
जिलेवर एजुकेटर आवंटन: कहाँ कितनी भर्तियाँ?
सभी 75 जिलों के बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) को एजुकेटर की संख्या के बारे में सूचित कर दिया गया है। प्रमुख जिलों में आवंटन इस प्रकार है:
- लखनऊ: 90
- श्रावस्ती: 60
- गोंडा: 170
- प्रयागराज, गोरखपुर, हरदोई, रायबरेली: हर जिले में 210
- सुल्तानपुर: 130
- जौनपुर: 220
- बहराइच: 140
पिछले साल की 10684 भर्तियाँ भी होंगी पूरी
विभाग ने साफ किया है कि पिछले साल की 10,684 ईसीसीई एजुकेटर भर्तियों को भी समय पर पूरा किया जाएगा। इससे प्रदेश में प्री-प्राइमरी शिक्षा का ढाँचा मजबूत होगा। बालवाटिकाओं में पढ़ाने वाले एजुकेटर बच्चों के शुरुआती विकास पर ध्यान देंगे, जिससे उनकी बुनियादी शिक्षा सुधरेगी।
क्यों जरूरी है यह कदम?
स्कूल विलय के बाद खाली पड़े परिसरों का सदुपयोग सरकार की प्राथमिकता है। साथ ही, आँगनबाड़ियों और बालवाटिकाओं में पढ़ाई का स्तर ऊँचा उठाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की तैनाती जरूरी थी। इससे न केवल संसाधनों का इस्तेमाल होगा, बल्कि गाँव-कस्बों के छोटे बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।
स्रोत: शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार
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