अयोध्या: सपा के बागी विधायक अभय सिंह को SC से जानलेवा हमला मामले में राहत, पार्टी बदलने की राह आसान #6 *KLW*
सारांश:
अयोध्या के गोसाईंगज विधायक अभय सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल पुराने जानलेवा हमले मामले (2010, महाराजगंज थाना) में राहत दी। हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले को बरकरार रखा। जस्टिस संजय कुमार-सतीश चंद्र शर्मा ने याचिका खारिज करते हुए कहा—"दो जजों का फैसला खिलाफ है, सुनवाई उचित नहीं।" सपा से निष्कासित अभय के भाजपा में शामिल होने की संभावना बढ़ी।
सुप्रीम कोर्ट ने दी हरी झंडी
अयोध्या के बाहुबली विधायक अभय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी जीत मिली है। 15 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में SC ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की डबल बेंच ने साफ कहा—"दो जजों ने आपके खिलाफ फैसला दिया है। ऐसे में सुनवाई उचित नहीं।" यह फैसला अभय के लिए राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
2010 का वो केस जिसने बनाई लंबी कहानी
मामला अयोध्या के महाराजगंज थाना क्षेत्र का है। साल 2010 में भाजपा कार्यकर्ता विकास सिंह ने अभय सिंह और उनके साथियों पर जानलेवा हमले का आरोप लगाया था। FIR में दावा किया गया कि विकास पर हथियारों से हमला हुआ। हालांकि, बाद में विरोधाभासी बयानों के चलते मामला अंबेडकरनगर कोर्ट ट्रांसफर हो गया। करीब 13 साल की सुनवाई के बाद 10 मई, 2023 को अदालत ने अभय समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
हाईकोर्ट में क्यों टूटी बेंच?
विकास सिंह ने अंबेडकरनगर कोर्ट के फैसले को लखनऊ हाईकोर्ट में चुनौती दी। यहाँ मामले ने नया मोड़ लिया:
- जस्टिस एआर मसूदी ने अभय को दोषी ठहराते हुए 3 साल की सजा सुनाई।
- जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव ने उन्हें बरी कर दिया।
विभाजित फैसले के बाद मामला तीसरे जज जस्टिस राजन राय के पास पहुँचा। 21 मार्च, 2025 को उन्होंने भी अभय को दोषमुक्त करते हुए कहा—"अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल। FIR में हमले का समय, हमलावरों की संख्या और हथियारों के बारे में स्पष्टता नहीं। पीड़ित के बयान भी बदलते रहे।"
राजनीतिक बगावत जिसने बदली तस्वीर
अभय सिंह सिर्फ कानूनी लड़ाई में ही नहीं, राजनीतिक सरगर्मियों में भी सुर्खियाँ बटोरते रहे हैं:
- फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सपा की लाइन तोड़कर भाजपा उम्मीदवार को वोट दिया।
- इस "बगावती कदम" के बाद सपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।
- तब से ही भाजपा में उनके शामिल होने की अटकलें जोरों पर थीं। अब सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बाद उनके लिए पार्टी बदलने का रास्ता और आसान हो गया है।
आगे क्या?
कानूनी पेंचों से मुक्ति मिलने के बाद अभय सिंह के राजनीतिक कदमों पर सबकी नजरें टिकी हैं। उनका भाजपा में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं, सपा इस फैसले पर चुप्पी साधे हुए है। जानकार मानते हैं कि अयोध्या की राजनीति में यह फैसला नए समीकरण खड़े कर सकता है।
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