BIG BREAKING : स्कूल विलय पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, सीतापुर में 21 अगस्त तक यथास्थिति बरकरार #12
सारांश:
लखनऊ हाईकोर्ट ने सीतापुर जिले में प्राथमिक स्कूलों के विलय पर 21 अगस्त तक रोक लगा दी। डबल बेंच ने सरकार से पूछा—"बच्चे स्कूल जाने को तैयार नहीं, तो मर्जर क्यों?" 16 जून के आदेश के खिलाफ छात्रों व शिक्षकों ने याचिका दायर की थी। सिंगल बेंच के 7 जुलाई के फैसले को चुनौती दी गई थी। यह आदेश अन्य जिलों के लिए नजीर बन सकता है । इससे पूरे उत्तर प्रदेश में स्कूल विलय पर रोक लगने की आशंका है।
हाईकोर्ट ने विलय प्रक्रिया पर लगाई रोक
लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने गुरुवार (24 जुलाई, 2025) को सीतापुर जिले में प्राथमिक स्कूलों के विलय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि 21 अगस्त की अगली सुनवाई तक स्कूलों की पुरानी स्थिति बहाल रखी जाए। यह फैसला तीन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया, जो 7 जुलाई के सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ दायर की गई थीं।
कोर्ट ने सरकार से पूछे सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से कड़े सवाल किए:
- "जब बच्चे दूर के स्कूल जाने को तैयार नहीं हैं, तो विलय का फैसला क्यों लिया गया?"
- "शिक्षकों पर दबाव क्यों बनाया जा रहा है?"
- "बिना सर्वे या प्लान के यह कदम कैसे उठाया गया?"
याचिकाकर्ताओं की ओर से शिक्षक दुर्गेश प्रताप सिंह ने बताया कि सरकार अपने ही नियम तोड़ रही है, जिसके तहत हर 1 किमी के दायरे में स्कूल होना चाहिए।
क्या है विवाद की जड़?
16 जून, 2025 को बेसिक शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर 50 से कम छात्रों वाले सरकारी स्कूलों का नजदीकी उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विलय करने का निर्देश दिया था। सरकार का दावा था कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा। हालांकि, 1 जुलाई को सीतापुर की छात्रा कृष्णा कुमारी समेत 51 बच्चों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस आदेश को शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून का उल्लंघन बताया।
शिक्षक और अभिभावक क्यों हैं चिंतित?
- दूरी बढ़ने का खतरा: उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की अध्यक्ष सुलोचना मौर्य ने कहा—"गरीब परिवार बच्चों को वैन नहीं दे सकते। दूर जाने से सुरक्षा खतरे में पड़ेंगे और ड्रॉपआउट बढ़ेगा।"
- कानूनी उल्लंघन: प्राइमरी शिक्षक संघ के अध्यक्ष योगेश त्यागी का आरोप है कि सरकार RTE एक्ट और बाल संरक्षण कानून तोड़ रही है।
- पदों पर संकट: पिछले विलयों में 28,000 प्रधानाध्यापकों के पद कम हुए और 70% स्कूलों में कार्यवाहक हेडमास्टर काम कर रहे हैं, जिन्हें अतिरिक्त भत्ता नहीं मिलता।
सरकार की योजना और तैयारी
सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत उठाया गया है। इसके तहत:
- हर जिले में मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय (कक्षा 1-8) खोले जाएंगे, जहां 450 छात्रों के लिए स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी और खेल मैदान होंगे।
- मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल (कक्षा 1-12) में 1,500 छात्रों की क्षमता होगी, जिस पर 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
छात्र संख्या में गिरावट का दबाव
आंकड़े चिंताजनक हैं:
- 2021-22 में सरकारी स्कूलों में 1.91 करोड़ छात्र थे, जो अब घटकर 1.49 करोड़ रह गए हैं।
- कोरोना के बाद प्राइवेट स्कूलों से लौटे बच्चे फिर से वापस जा रहे हैं। शिक्षा अधिकारी मानते हैं कि शिक्षकों की अनिच्छा और गुणवत्ता की कमी इसकी वजह है।
आगे क्या होगा?
21 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई तक विलय प्रक्रिया ठप रहेगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सीतापुर का यह आदेश अन्य जिलों के लिए नजीर बन सकता है, जहां भी ऐसी याचिकाएं दायर की जा सकती हैं। इससे पूरे उत्तर प्रदेश में स्कूल विलय पर रोक लगने की आशंका है।
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