गोरखपुर: 600 ट्रेनी महिला सिपाहियों का प्रदर्शन, बाथरूम में कैमरे और खराब व्यवस्था का दावा - हंगामा #8 *HKOW*
[सारांश:] गोरखपुर के पीएसी कैंपस में 21 जुलाई से ट्रेनिंग कर रहीं 600 महिला सिपाहियों ने 23 जुलाई को प्रदर्शन किया। कथित तौर पर बाथरूम में कैमरे, बिजली-पानी की कमी, खराब खाना और भीड़भाड़ से नाराज थीं। प्रेग्नेंसी टेस्ट का आदेश विवाद के बाद रद्द हुआ। कमांडेंट आनंद कुमार ने जांच का भरोसा दिया।
गोरखपुर में ट्रेनिंग सेंटर से क्यों भड़कीं महिला सिपाही?
गोरखपुर के बिछिया स्थित पीएसी कैंपस में ट्रेनिंग कर रहीं करीब 600 महिला सिपाहियों ने बुधवार, 23 जुलाई 2025 की सुबह 8 बजे हंगामा शुरू कर दिया। रोती-चिल्लाती ये प्रशिक्षु सेंटर से बाहर निकलीं और व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनकी शिकायतें गंभीर थीं - बाथरूम में कैमरे लगे होने से लेकर बिजली, पानी और खाने तक की खराब स्थिति। यह ट्रेनिंग सोमवार, 21 जुलाई से शुरू हुई थी, लेकिन दो दिन में ही हालात बेकाबू हो गए।
क्या हुआ घटनास्थल पर?
सुबह जैसे ही महिला सिपाहियों ने प्रदर्शन शुरू किया, माहौल तनावपूर्ण हो गया। कथित तौर पर एक प्रशिक्षु ने कहा, "बाथरूम में कैमरे लगे हैं, हमारे वीडियो बन गए। अब क्या होगा?" कई लड़कियां गर्मी और परेशानी से बीमार पड़ गईं। कुछ रोते हुए अपनी बात रख रही थीं। सूचना मिलते ही पीएसी कमांडेंट आनंद कुमार और सीओ दीपांशी राठौड़ मौके पर पहुंचे। उन्होंने लड़कियों को समझाया और सेंटर वापस भेजा। एंबुलेंस भी बुलाई गई थी।
महिला सिपाहियों की मुख्य शिकायतें क्या थीं?
कथित तौर पर प्रशिक्षुओं ने कई समस्याएं गिनाईं:
- बाथरूम में कैमरे: लड़कियों ने बताया कि बाथरूम में कैमरे लगे हैं, जिससे उनकी निजता खतरे में है।
- बिजली की किल्लत: रातभर बिजली नहीं थी, जनरेटर भी नहीं। सभी को अंधेरे में जागना पड़ा।
- पानी की कमी: वॉशरूम में पानी नहीं, पीने को सिर्फ आधा लीटर मिलता है। RO भी छोटा है।
- खराब खाना: खाने की गुणवत्ता इतनी खराब कि कोई संतुष्ट नहीं।
- भीड़भाड़: सेंटर में 360 की जगह 600 लड़कियां ठहरी हैं, जगह की भारी कमी।
एक प्रशिक्षु ने कहा, "जब तक ये समस्याएं हल नहीं होतीं, हम ट्रेनिंग नहीं करेंगी।" बाराबंकी की प्रशिक्षु ने कैमरों की शिकायत की।
प्रेग्नेंसी टेस्ट का विवाद कैसे शुरू हुआ?
ट्रेनिंग से पहले डीआईजी रोहन पी. ने अविवाहित लड़कियों के प्रेग्नेंसी टेस्ट का आदेश दिया था। इससे सिपाही नाराज हो गईं। हंगामे के बाद आईजी ट्रेनिंग चंद्र प्रकाश ने इसे रद्द कर दिया। उन्होंने कहा, "कोई टेस्ट नहीं होगा। गर्भवती प्रशिक्षु शपथ पत्र देकर बाद के बैच में जा सकती हैं।" नियम है कि शादीशुदा सिपाहियों की जांच होती है, अविवाहित सिर्फ शपथ पत्र देती हैं।
अधिकारियों ने क्या कदम उठाया?
हंगामे की खबर फैलते ही सीनियर अफसर मौके पर पहुंचे। कमांडेंट आनंद कुमार ने लड़कियों को भरोसा दिया कि उनकी शिकायतों की जांच होगी और समाधान निकाला जाएगा। इसके बाद स्थिति नियंत्रण में आई।
सोशल मीडिया पर क्या बोले लोग?
आज (23 जुलाई 2025) तक इस घटना पर कुछ ट्वीट्स सामने आए। एक यूजर ने लिखा, "गोरखपुर में महिला सिपाहियों के साथ ऐसा व्यवहार शर्मनाक है। बाथरूम में कैमरे? ये कहां की व्यवस्था है!" हालांकि, अभी बड़ी प्रतिक्रिया नहीं दिखी।
आगे क्या होगा?
यदि जांच रिपोर्ट में आरोप सत्य पाया जाता है तो यह प्रदर्शन ट्रेनिंग सेंटर की खामियों को उजागर करता है। अधिकारियों ने जांच का वादा किया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या जल्द सुधार होगा? लड़कियों की निजता और बुनियादी सुविधाओं का ध्यान रखना कितना जरूरी है, यह घटना उसकी याद दिलाती है। आने वाले दिनों में प्रशासन के कदम पर सबकी नजर रहेगी।
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