अयोध्या: एमनेस्टी योजना में 5,225 व्यापारियों को 84 करोड़ की कर राहत #6 *JLLE*
[सारांश:]
अयोध्या जोन के 5,225 व्यापारियों को एमनेस्टी योजना में 84 करोड़ रुपये का ब्याज और जुर्माना माफ। 61.88 करोड़ मूल कर जमा। संभाग ए (अयोध्या, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, अमेठी) को सर्वाधिक राहत। 4,551 व्यापारी योजना से वंचित। 2017-20 के बकाया करों के लिए थी योजना।
अयोध्या में व्यापारियों को मिली बड़ी कर राहत
अयोध्या। राज्य कर विभाग की एमनेस्टी योजना ने अयोध्या जोन के 5,225 व्यापारियों को आर्थिक बोझ से मुक्ति दिलाई है। इस योजना के तहत 84 करोड़ रुपये के ब्याज और जुर्माने की छूट दी गई। व्यापारियों ने 61.88 करोड़ रुपये का मूल कर जमा किया, जिसके एवज में 67.91 करोड़ रुपये का ब्याज और 16.33 करोड़ रुपये का जुर्माना माफ हुआ। हालांकि, 4,551 व्यापारी इस अवसर से चूक गए।
एमनेस्टी योजना का पूरा घटनाक्रम
राज्य कर विभाग ने बकाया करों से परेशान व्यापारियों को राहत देने के लिए एमनेस्टी योजना लागू की थी। इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के बकाया कर जमा करने पर ब्याज और जुर्माना माफ करने का प्रावधान था। इसके लिए व्यापारियों को पहले से दाखिल अपील वापस लेनी थी या नई अपील दाखिल नहीं करनी थी। जीएसटी अधिवक्ता पीयूष सिंघल ने बताया कि यह योजना सीजीएसटी अधिनियम की धारा 61/73 के तहत नोटिस प्राप्त व्यापारियों के लिए थी। जिन व्यापारियों ने पहले ही ब्याज या जुर्माना चुका दिया था, उन्हें रिफंड का कोई प्रावधान नहीं था।
कितने व्यापारियों ने उठाया लाभ?
अयोध्या जोन के नौ जिलों में करीब 70,000 पंजीकृत व्यापारी हैं। इनमें से 9,776 व्यापारियों पर 180.77 करोड़ रुपये का कर बकाया था, जिसमें 179.32 करोड़ रुपये ब्याज और 36.40 करोड़ रुपये जुर्माना शामिल था। योजना के तहत 5,225 व्यापारियों ने आवेदन किया, जिनमें:
- संभाग ए (अयोध्या, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, अमेठी): 1,611 व्यापारियों ने 31.67 करोड़ रुपये ब्याज और 5.88 करोड़ रुपये जुर्माना माफ करवाया।
- संभाग बी: 2,123 व्यापारियों को राहत मिली।
- गोंडा: 1,491 व्यापारियों ने योजना का लाभ लिया।
संभाग ए को क्यों मिली सबसे अधिक राहत?
संभाग ए, जिसमें अयोध्या, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर और अमेठी शामिल हैं, को इस योजना से सबसे अधिक फायदा हुआ। यहां केवल 1,611 व्यापारियों ने आवेदन किया, लेकिन ब्याज और जुर्माने में मिली छूट के मामले में यह क्षेत्र अव्वल रहा। यह दर्शाता है कि संभाग ए के व्यापारियों ने योजना को लेकर अधिक जागरूकता दिखाई।
4,551 व्यापारी क्यों रह गए वंचित?
जोन के 9,776 बकायादार व्यापारियों में से केवल 5,225 ने ही योजना के लिए आवेदन किया। बाकी 4,551 व्यापारी इस राहत से वंचित रह गए। इसके पीछे आवेदन प्रक्रिया की जानकारी का अभाव, समय की कमी या अपील वापस न लेने जैसे तकनीकी कारण हो सकते हैं।
योजना क्यों रही कारगर?
जीएसटी अधिवक्ता पीयूष सिंघल के अनुसार, यह योजना व्यापारियों के लिए वरदान साबित हुई। बकाया कर के दबाव से जूझ रहे व्यापारियों को आर्थिक राहत मिली, जिससे उनके व्यवसाय को नया बल मिलेगा। यह कदम सरकार की व्यापारी हितैषी नीतियों को दर्शाता है।
आगे की राह
राज्य कर विभाग की यह योजना व्यापारियों में विश्वास जगाने में सफल रही है। जिन व्यापारियों ने इसका लाभ नहीं लिया, वे भविष्य में ऐसी योजनाओं पर नजर रख सकते हैं। व्यापारियों को सलाह है कि वे कर संबंधी योजनाओं और नियमों के प्रति जागरूक रहें, ताकि भविष्य में ऐसे अवसरों का लाभ उठा सकें।
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